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राजस्थान रॉयल्स अधिग्रहण को सीसीआई की मंजूरी

मित्तल परिवार और अदार पूनावाला से जुड़े अधिग्रहण को मंजूरी मिली। सौदे में राजस्थान रॉयल्स के साथ दो विदेशी क्रिकेट टीमें भी शामिल हैं।

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राजस्थान रॉयल्स अधिग्रहण को सीसीआई की मंजूरी

राजस्थान रॉयल्स के स्वामित्व से जुड़े प्रस्तावित बदलाव को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग यानी सीसीआई की मंजूरी मिल गई है। नवभारत टाइम्स की 21 सितंबर, 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लक्ष्मी मित्तल के परिवार और अदार पूनावाला से जुड़े इस अधिग्रहण में भारतीय टीम के साथ पार्ल रॉयल्स और बारबाडोस रॉयल्स भी शामिल हैं। भारत के खेल फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए इस खबर का केंद्र एक टीम की खरीद नहीं, बल्कि तीन देशों में मौजूद टीमों के समूह का नियंत्रण है।

17 सितंबर को घोषित हुई नियामकीय मंजूरी

नवभारत टाइम्स ने ‘बिलियनेयर्स अफ्रीका’ की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि सीसीआई ने 17 सितंबर को अधिग्रहण की मंजूरी घोषित की। इसमें इंडियन प्रीमियर लीग की राजस्थान रॉयल्स, दक्षिण अफ्रीका की एसए20 लीग की पार्ल रॉयल्स और कैरेबियन प्रीमियर लीग की बारबाडोस रॉयल्स शामिल हैं।

रिपोर्ट में सौदे का मूल्य लगभग 1.65 अरब डॉलर, यानी करीब 15,838 करोड़ रुपये बताया गया है। अधिग्रहण की घोषणा इसी वर्ष की शुरुआत में की गई थी। उस घोषणा के संदर्भ में 1.65 अरब डॉलर की राशि को उद्यम मूल्य के रूप में बताया गया है। इसलिए इस आंकड़े को किसी अकेली टीम का मूल्य या किसी एक निवेशक द्वारा चुकाई जाने वाली रकम नहीं समझना चाहिए।

यह खबर विशेष रूप से अधिग्रहण को मिली प्रतिस्पर्धा नियामक की मंजूरी के बारे में है। उपलब्ध रिपोर्ट से सौदे की सभी प्रक्रियाएं पूरी होने या टीमों का रोजमर्रा का प्रबंधन नए मालिकों को सौंपे जाने की अलग से पुष्टि नहीं होती। मंजूरी और वास्तविक नियंत्रण हस्तांतरण को अलग-अलग चरणों के रूप में पढ़ना जरूरी है।

मित्तल परिवार की लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी

अधिग्रहण वेस्टव्यू क्रिकेट लिमिटेड के जरिए किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह मित्तल परिवार के स्वामित्व वाली ब्रिटेन में पंजीकृत निवेश कंपनी है। सौदे में पूनावाला स्पोर्ट्स एंड फिटनेस प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल है।

लक्ष्मी मित्तल और उनके बेटे आदित्य मित्तल के नेतृत्व वाला परिवार वेस्टव्यू क्रिकेट के माध्यम से फ्रैंचाइज़ समूह की लगभग 75 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करेगा। पूनावाला की हिस्सेदारी लगभग 18 प्रतिशत बताई गई है। शेष लगभग सात प्रतिशत हिस्सेदारी मौजूदा निवेशकों के पास रहने की उम्मीद है, जिनमें मनोज बडाले भी शामिल हैं।

ये अनुपात प्रस्तावित स्वामित्व संरचना को समझने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक मित्तल परिवार सबसे बड़ा हिस्सेदार होगा, जबकि पूनावाला भी नए निवेशक समूह का हिस्सा होंगे। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में निदेशक मंडल की संरचना, अलग-अलग निवेशकों के मतदान अधिकार या टीम संचालन की जिम्मेदारियों का विवरण नहीं दिया गया है। केवल हिस्सेदारी के अनुपात के आधार पर इन विषयों पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

एक सौदे में तीन क्रिकेट टीमों का दायरा

इस अधिग्रहण की संरचना में मॉरीशस स्थित ईएम स्पोर्टिंग होल्डिंग्स महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार, यह उन कंपनियों की मालिक है जो राजस्थान रॉयल्स, पार्ल रॉयल्स और बारबाडोस रॉयल्स का संचालन करती हैं। इस तरह लेनदेन का दायरा भारत की एक क्रिकेट फ्रैंचाइज़ तक सीमित नहीं है।

समझौते से नए निवेशक समूह को भारत, दक्षिण अफ्रीका और कैरेबियन में खेलने वाली टीमों का नियंत्रण मिलेगा। खबर का अंतरराष्ट्रीय पहलू इसी साझा स्वामित्व ढांचे में है: अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली तीन टीमें एक ही अधिग्रहण के अंतर्गत आती हैं।

भारतीय फ्रैंचाइज़ समुदाय के पाठकों के लिए यहां एक महत्वपूर्ण अंतर भी है। यह मौजूदा खेल फ्रैंचाइज़ समूह में स्वामित्व खरीदने का सौदा है, न कि किसी नए आउटलेट, स्थानीय इकाई या सामान्य फ्रैंचाइज़ साझेदारी की पेशकश। रिपोर्ट में छोटे निवेशकों के लिए आवेदन, फ्रैंचाइज़ शुल्क या नई कारोबारी इकाइयां खोलने की कोई घोषणा नहीं है।

पहले प्रस्ताव के बाद अब मंजूरी का चरण

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि मौजूदा अधिग्रहण की घोषणा अमेरिकी निवेशकों के नेतृत्व वाले गठबंधन से जुड़ा पहले प्रस्तावित सौदा विफल होने के बाद हुई थी। उस पुराने प्रस्ताव में फ्रैंचाइज़ समूह का मूल्य लगभग 1.63 अरब डॉलर आंका गया था। मौजूदा सौदे की घोषित उद्यम मूल्य राशि लगभग 1.65 अरब डॉलर है।

उपलब्ध जानकारी पुराने प्रस्ताव के विफल होने के कारणों या दोनों प्रस्तावों की विस्तृत शर्तों को स्पष्ट नहीं करती। इसलिए केवल घोषित मूल्य के अंतर से सौदे की गुणवत्ता, संभावित लाभ या निवेशकों की रणनीति का आकलन नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुष्ट खबर नियामकीय मंजूरी, तीन टीमों का दायरा और रिपोर्ट में बताई गई हिस्सेदारी संरचना है।

व्यावहारिक सीख: किसी फ्रैंचाइज़ अधिग्रहण की खबर पढ़ते समय घोषित मूल्य, खरीदी जा रही हिस्सेदारी और नियामकीय मंजूरी को अलग-अलग जांचें। यहां अगली जरूरी पुष्टि सौदा पूरा होने और अंतिम स्वामित्व संरचना की होगी।

स्रोत

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