गाजियाबाद: एटीएम फ्रैंचाइज़ संचालक पर 77.28 लाख गबन का आरोप
31 एटीएम में नकदी डालने से जुड़े मामले में अदालत के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है। पुलिस 77.28 लाख रुपये के कथित गबन की जांच कर रही है।
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गाजियाबाद में एटीएम में नकदी डालने और रखरखाव से जुड़े एक फ्रैंचाइज़ समझौते का विवाद पुलिस जांच तक पहुंच गया है। Hitachi Payment Services Private Limited के सहायक प्रबंधक की शिकायत पर एक फ्रैंचाइज़ संचालक के खिलाफ 77.28 लाख रुपये के कथित गबन का मुकदमा दर्ज हुआ है। अदालत के आदेश पर दर्ज इस मामले में आरोपों की जांच जारी है।
31 एटीएम की जिम्मेदारी से जुड़ा मामला
24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित लाइव हिन्दुस्तान की खबर के अनुसार, कंपनी में सहायक प्रबंधक घनश्याम ने अदालत में शिकायत दी थी। शिकायत में बताया गया कि कंपनी विभिन्न बैंकों के एटीएम में नकदी डालने और उनके रखरखाव का काम करती है। इसके लिए अलग-अलग शहरों में फ्रैंचाइज़ संचालकों के साथ समझौते किए जाते हैं।
शिकायत के मुताबिक, गाजियाबाद में यह जिम्मेदारी सेवानगर निवासी गौरव वर्मा को दी गई थी, जो जीडी सर्विसेज के फ्रैंचाइज़ संचालक हैं। व्यवस्था के तहत शहर के कुल 31 एटीएम में नकदी डालने और रखरखाव का काम उनके जिम्मे था। इस काम के लिए गाजियाबाद की ICICI Bank शाखा में उनके खाते में रकम भेजी जाती थी।
यह मामला किसी नई फ्रैंचाइज़ की बिक्री या शुरुआती निवेश जुटाने से संबंधित नहीं है। शिकायत एक संचालन व्यवस्था के दौरान भेजी गई नकदी और उसके उपयोग के हिसाब को लेकर है। इसलिए विवाद का केंद्र फ्रैंचाइज़ संबंध के भीतर सौंपी गई वित्तीय जिम्मेदारी है।
भेजी गई रकम और कथित अंतर का ब्यौरा
कंपनी की शिकायत के अनुसार, 23 सितंबर 2025 से 18 जनवरी 2026 के बीच इन 31 एटीएम में नकदी डालने के लिए फ्रैंचाइज़ संचालक के खाते में 57.60 करोड़ रुपये भेजे गए थे। आरोप है कि इसमें से 77.28 लाख रुपये का हिसाब नहीं दिया गया और यह रकम एटीएम में नहीं डाली गई।
शिकायतकर्ता का कहना है कि कंपनी ने कई बार संपर्क करके रकम का हिसाब मांगा, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायत में कंपनी कर्मचारियों के साथ अभद्रता किए जाने और रकम वापस करने के बजाय उसे हड़प लेने का आरोप भी लगाया गया है। ये सभी शिकायतकर्ता के आरोप हैं; इन्हें जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं पढ़ा जाना चाहिए।
दोनों रकम का अंतर समझना महत्वपूर्ण है। 57.60 करोड़ रुपये उस अवधि में नकदी डालने के लिए भेजी गई कुल रकम बताई गई है, जबकि कथित तौर पर हिसाब न मिलने और गबन का आरोप 77.28 लाख रुपये से संबंधित है। पूरी हस्तांतरित राशि को कथित नुकसान कहना सही नहीं होगा। इसी तरह, 31 एटीएम का उल्लेख जिम्मेदारी के दायरे को बताता है, प्रत्येक मशीन में अलग-अलग गड़बड़ी की पुष्टि नहीं करता।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस जांच
शिकायत के अनुसार, कंपनी ने आठ जुलाई से कई बार पुलिस को शिकायत दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद शिकायतकर्ता ने अदालत का रुख किया। न्यायालय के आदेश पर नंदग्राम थाने में फ्रैंचाइज़ संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
एसीपी नंदग्राम जियाउद्दीन अहमद ने मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। उनके अनुसार, मामले की जांच की जा रही है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल खबर का पुष्ट प्रक्रियागत तथ्य मुकदमे का दर्ज होना और जांच जारी रहना है।
मुकदमा दर्ज होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। रकम के उपयोग, उसके हिसाब और कथित गबन को लेकर शिकायत में किए गए दावों की जांच अभी बाकी है। इस घटनाक्रम को किसी नए नियामकीय बदलाव या सभी एटीएम फ्रैंचाइज़ व्यवस्थाओं पर लागू निष्कर्ष के तौर पर भी नहीं देखा जाना चाहिए।
फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए व्यावहारिक सीख
इस मामले से फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए समीक्षा का एक स्पष्ट विषय निकलता है: जहां साझेदार को नकदी संभालने की जिम्मेदारी दी जाती है, वहां रकम भेजने और उसके उपयोग के रिकॉर्ड का मिलान कैसे होता है? यह सावधानी संबंधी प्रश्न है, इस विशेष मामले में किसी नियंत्रण की कमी का स्थापित निष्कर्ष नहीं।
ऐसे समझौते पर विचार करने वाले व्यवसायों और संचालकों को जिम्मेदारियों, हिसाब देने की समयसीमा, रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और अंतर मिलने पर समाधान की प्रक्रिया लिखित रूप में स्पष्ट करनी चाहिए। संचालन के दौरान दोनों पक्षों के लिए रकम प्राप्त होने, निर्धारित काम में उपयोग होने और बकाया हिसाब की स्थिति का दस्तावेजी रिकॉर्ड रखना उपयोगी होगा।
व्यावहारिक निष्कर्ष: नकदी प्रबंधन वाली फ्रैंचाइज़ में समझौते के साथ नियमित हिसाब-मिलान की प्रक्रिया भी जांचें। गाजियाबाद के मामले में आगे का निष्कर्ष पुलिस जांच के तथ्यों पर निर्भर करेगा।



