7-Eleven के भारत में सभी स्टोर बंद, आगे के विकल्प खुले
Reliance Retail ने सितंबर के अंत तक 7-Eleven के सभी 31 स्टोर बंद किए। ब्रांड भारत में दीर्घकालिक मौजूदगी के विकल्प तलाशना चाहता है।
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भारत में Reliance Retail के जरिए संचालित 7-Eleven के सभी स्टोर बंद हो गए हैं, लेकिन जापानी सुविधा-स्टोर शृंखला ने देश में भविष्य की मौजूदगी की संभावना खत्म नहीं की है। सीएनबीसी की 10 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि उसके मास्टर फ्रैंचाइज़ संचालक Reliance Retail ने सितंबर के अंत तक सभी 31 आउटलेट बंद कर दिए। भारतीय फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए यह घटनाक्रम विस्तार के साथ परिचालन की लाभप्रदता पर ध्यान देने की जरूरत सामने रखता है।
31 स्टोर बंद होने की पुष्टि, 60 का आंकड़ा क्यों आया
शुरुआती खबरों में लगभग 60 स्टोर और उनमें से अधिकांश के बंद होने की बात कही गई थी। ईटीसीएफओ ने 5 अक्टूबर को मामले से परिचित लोगों के हवाले से बताया था कि Reliance Retail और 7-Eleven अपनी पांच साल पुरानी साझेदारी समाप्त कर रहे हैं। उस रिपोर्ट में कुछ दुकानों पर बंद होने से पहले बचा हुआ माल निकालने का भी उल्लेख था।
इसके बाद आंत्रप्रेन्योर इंडिया की 7 अक्टूबर की रिपोर्ट ने दोनों आंकड़ों का संदर्भ स्पष्ट किया। उसके अनुसार, इस प्रारूप के तहत अपने अधिकतम विस्तार के समय लगभग 60 स्टोर संचालित थे और इनकी मौजूदगी मुंबई तथा पुणे तक सीमित थी। अंतिम बंदी से पहले इनमें से कई आउटलेट पहले ही बंद हो चुके थे।
उसी रिपोर्ट में Seven & i Holdings के प्रवक्ता ने कहा कि Reliance द्वारा संचालित सभी 31 स्टोर 30 सितंबर 2026 तक बंद हो गए। सीएनबीसी की बाद की रिपोर्ट में भी 31 आउटलेट की बंदी की पुष्टि हुई। इसलिए लगभग 60 स्टोर के पुराने नेटवर्क और अंतिम चरण के 31 स्टोर को एक ही समय का आंकड़ा मानना सही नहीं होगा।
पांच साल की साझेदारी और लगातार घाटा
Reliance Retail और 7-Eleven ने 2021 में साझेदारी की घोषणा की थी। इससे पहले 7-Eleven का Future Retail के साथ समझौता समाप्त हो चुका था। Reliance के साथ अक्टूबर 2021 में हुए मास्टर फ्रैंचाइज़ समझौते के बाद मुंबई में पहला स्टोर खोला गया था। उद्देश्य Reliance के खुदरा नेटवर्क के सहारे इस अंतरराष्ट्रीय सुविधा-स्टोर प्रारूप को भारत में स्थापित करना था।
हालांकि, वित्तीय नतीजे चुनौतीपूर्ण रहे। Reliance Retail की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी 7-India Convenience Retail ने मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में लगभग 92 करोड़ रुपये का राजस्व और करीब 90 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया। सीएनबीसी और ईटीसीएफओ, दोनों ने इन वित्तीय आंकड़ों का उल्लेख किया है।
सीएनबीसी ने ट्रैक्सन के आंकड़ों के आधार पर बताया कि मार्च 2022 को समाप्त वित्त वर्ष में घाटा लगभग 5.2 करोड़ रुपये था और उसके बाद लगातार बढ़ा। ईटीसीएफओ के मुताबिक, कारोबार उस पैमाने तक नहीं पहुंच पाया जो ब्रांडेड स्टोर चलाने की अपेक्षाकृत ऊंची लागत की भरपाई कर सके। ये पूरे कारोबार के आंकड़े हैं; इन्हें किसी एक आउटलेट के खर्च या नुकसान का अनुमान नहीं माना जाना चाहिए।
किराना और त्वरित डिलीवरी के बीच कठिन मुकाबला
इस बंदी के पीछे केवल विस्तार की गति नहीं, स्थानीय खरीदारी का ढांचा भी महत्वपूर्ण है। ईटीसीएफओ की रिपोर्ट के अनुसार, एक ओर पड़ोस की किराना दुकानें ग्राहकों की तत्काल जरूरतें पूरी करती हैं, वहीं दूसरी ओर त्वरित डिलीवरी सेवाएं स्नैक्स, किराना और रोजमर्रा की वस्तुएं कुछ ही मिनटों में घर पहुंचाती हैं।
ऐसे मुकाबले में संगठित सुविधा-स्टोर के लिए अधिक कीमत लेना या प्रति दुकान इतनी बिक्री हासिल करना कठिन होता है कि किराया, कर्मचारी, माल और आपूर्ति व्यवस्था का खर्च निकल सके। अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की पहचान के बावजूद स्थानीय ग्राहक को दुकान तक आने का ठोस कारण देना जरूरी रहता है।
सीएनबीसी से बातचीत में विश्लेषकों ने कहा कि जापानी कंपनियों के लिए पारंपरिक किराना-केंद्रित मॉडल से अलग पेशकश की संभावना हो सकती है। हालांकि, यह विश्लेषकों का आकलन है, 7-Eleven की घोषित नई भारतीय रणनीति नहीं।
भारत से स्थायी विदाई नहीं, अगला कदम अनिश्चित
7-Eleven के प्रतिनिधि ने सीएनबीसी को बताया कि कंपनी अब भी भारत के ग्राहकों को सेवाएं देना चाहती है और लंबी अवधि में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के कई विकल्प तलाशने की इच्छुक है। Grant Thornton Bharat के साझेदार सोहराब बरारिया ने बंदी को भारत छोड़ने के बजाय मौजूदा फ्रैंचाइज़ व्यवस्था पर पुनर्विचार के रूप में देखा।
ईटीसीएफओ की शुरुआती रिपोर्ट में दूसरे भारतीय साझेदार की तलाश की संभावना बताई गई थी, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया गया था कि कोई निर्णय नहीं हुआ है। इसलिए नए साझेदार, दोबारा खुलने की तारीख या अगले संचालन मॉडल को अभी तय योजना नहीं माना जा सकता।
व्यावहारिक सीख: फ्रैंचाइज़ समुदाय के संभावित निवेशक ब्रांड की प्रसिद्धि के साथ स्थानीय मांग, प्रति आउटलेट खर्च, प्रतिस्पर्धा और समझौता समाप्त होने की शर्तों की जांच करें। विस्तार का लक्ष्य तभी उपयोगी है, जब दुकान चलाने का आर्थिक आधार टिकाऊ हो।
स्रोत
- Reliance Retail, 7-Eleven end a five-year India franchise deal as convenience stores struggle
- Why Japan's 7-Eleven store closures in India don’t signal an exit
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