ऐश्प्रा के 10 नए फ्रैंचाइज़ स्टोर, 500 करोड़ निवेश की योजना
ऐश्प्रा मार्च 2028 तक फ्रैंचाइज़ मॉडल पर 10 नए स्टोर खोलेगी। करीब 500 करोड़ रुपये के निवेश की योजना में उत्तर प्रदेश और बिहार पर ध्यान है।
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ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स ने मार्च 2028 तक फ्रैंचाइज़ मॉडल के तहत 10 नए आभूषण स्टोर खोलने की योजना घोषित की है। कंपनी के निदेशक सौमित्र सराफ के मुताबिक, इस विस्तार पर करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। उत्तर प्रदेश में मुख्य रूप से कारोबार करने वाली कंपनी का ध्यान फिलहाल उत्तर प्रदेश और बिहार पर है।
चार नई शुरुआतों के साथ 20 स्टोर का नेटवर्क
23 अक्टूबर 2026 को पीटीआई-भाषा की खबर के अनुसार, ऐश्प्रा ने शुक्रवार को चार नए आभूषण स्टोर खोलने की घोषणा की। ये स्टोर उत्तर प्रदेश के बहराइच, लखनऊ और मिर्जापुर तथा बिहार के बेतिया में खुले हैं। इन नई शुरुआतों के साथ कंपनी के खुदरा स्टोर की कुल संख्या 20 हो गई है।
बेतिया का स्टोर कंपनी के लिए एक नए राज्य में प्रवेश भी है। इसके जरिए ऐश्प्रा ने बिहार में कदम रखा है, जबकि उसका कारोबार अभी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश में केंद्रित है। इस तरह हालिया विस्तार में अपने प्रमुख बाजार में मौजूदगी बढ़ाने और पड़ोसी राज्य में शुरुआत करने, दोनों कदम शामिल हैं।
कंपनी का अगला घोषित लक्ष्य मार्च 2028 तक कुल 30 स्टोर तक पहुंचना है। मौजूदा 20 स्टोर और आगे प्रस्तावित 10 स्टोर को अलग समझना जरूरी है: चार नई शुरुआतें वर्तमान नेटवर्क का हिस्सा हैं, जबकि अगले 10 स्टोर भविष्य की विस्तार योजना हैं।
अगले 10 स्टोर के लिए फ्रैंचाइज़ मॉडल
सराफ ने नए स्टोर की शुरुआत के मौके पर पीटीआई-भाषा से कहा कि मार्च 2028 तक खुलने वाले 10 नए आभूषण स्टोर फ्रैंचाइज़ मॉडल के तहत संचालित किए जाएंगे। भारत के फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए इस घोषणा का केंद्रीय पहलू यही है कि कंपनी ने अगले चरण के विस्तार का मॉडल स्पष्ट किया है।
निवेश के बारे में सराफ ने बताया कि एक स्टोर पर करीब 50 करोड़ रुपये का निवेश होता है। इसी आधार पर 10 नए स्टोर के लिए कुल अनुमान करीब 500 करोड़ रुपये रखा गया है। यह प्रस्तावित विस्तार का निवेश अनुमान है; इसे कंपनी के कारोबार या किसी एक भागीदार के लिए घोषित फ्रैंचाइज़ शुल्क के रूप में नहीं पढ़ना चाहिए।
संभावित भागीदारों के लिए प्रति स्टोर निवेश का यह संकेत शुरुआती वित्तीय आकलन में उपयोगी हो सकता है। हालांकि, वास्तविक निर्णय के लिए कंपनी और फ्रैंचाइज़ भागीदार की जिम्मेदारियां, पूंजी का बंटवारा, आभूषणों के भंडार की व्यवस्था और संचालन की शर्तें लिखित समझौते में समझना जरूरी होगा। कुल निवेश का आंकड़ा अपने आप में भागीदारी की पूरी लागत-संरचना नहीं बताता।
उत्तर प्रदेश और बिहार पर प्राथमिकता
सराफ के अनुसार, कंपनी अभी उत्तर प्रदेश और बिहार पर ध्यान दे रही है, क्योंकि उसे इन दोनों राज्यों में काफी संभावनाएं दिखाई देती हैं। उन्होंने अगले दो से ढाई साल में दूसरे राज्यों में भी विस्तार पर विचार करने की बात कही है।
इस बयान में तत्काल प्राथमिकता और लंबी अवधि की संभावना के बीच स्पष्ट अंतर है। उत्तर प्रदेश और बिहार मौजूदा फोकस हैं, जबकि अन्य राज्यों में विस्तार अभी विचार का विषय है। इसलिए दूसरे राज्यों में प्रवेश को तय उद्घाटन कार्यक्रम या निश्चित स्टोर योजना मानना उचित नहीं होगा।
फ्रैंचाइज़ अवसर का मूल्यांकन करने वालों के लिए यह भौगोलिक प्राथमिकता महत्वपूर्ण है। किसी शहर में संभावित मांग का आकलन करने के साथ यह भी देखना चाहिए कि वह स्थान ब्रांड की विस्तार दिशा से मेल खाता है या नहीं। बेतिया में प्रवेश बिहार में कंपनी की पहली मौजूदगी है, लेकिन इससे राज्य के अन्य शहरों में स्वतः किसी निश्चित समयसीमा का निष्कर्ष नहीं निकलता।
कारोबार की उम्मीद और उत्पादों में विस्तार
सराफ ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में ऐश्प्रा का कारोबार 2,300 करोड़ रुपये रहा। चालू वित्त वर्ष में कंपनी को इसके करीब 30 प्रतिशत बढ़कर 3,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। यह कंपनी की अपेक्षा है, हासिल किया हुआ परिणाम नहीं।
स्टोर नेटवर्क बढ़ाने के साथ ऐश्प्रा उत्पादों की श्रेणी भी विस्तृत कर रही है। पारंपरिक और शादी के आभूषणों के अलावा कंपनी अपने लाइफस्टाइल आभूषण ब्रांड ‘ज्वेल स्टोरी’ के तहत हल्के और आधुनिक हीरे के आभूषण पेश कर रही है। इसका उद्देश्य युवा ग्राहकों को आकर्षित करना है।
फ्रैंचाइज़ समुदाय के लिए यह विस्तार केवल स्टोर संख्या की खबर नहीं है। प्रस्तावित साझेदारी का मूल्यांकन करते समय उत्पादों की श्रेणी, स्थानीय ग्राहक आधार और बड़े निवेश की जरूरत को साथ देखना होगा। कंपनी का कुल कारोबार किसी प्रस्तावित स्टोर की बिक्री या लाभ का अनुमान नहीं माना जाना चाहिए।
व्यावहारिक निष्कर्ष: इच्छुक भागीदार करीब 50 करोड़ रुपये प्रति स्टोर के निवेश संकेत को शुरुआती संदर्भ मानें। आगे बढ़ने से पहले स्थान, पूंजीगत जिम्मेदारियों, भंडार और संचालन संबंधी शर्तों की लिखित पुष्टि लें।



